Celeberities ही नहीं , general public में भी Social media में 1 लहर सी दौड़ती है everything nice , best husband , best wife , nice kids , perfect parents ,awesome job, 1st classs certifications, loads of bank balance etc , It's nice to feel that gratitude with a feeling though.पर एक तरफ सत्संग में सुनते है , संसार दुखालय है , मिथ्या है ,मोह माया है और दूसरी तरफ social platforms and कई लोगो को देखो तो सब Tip Top लगते है ,विदेश में तो खासकर |
अगर सब इतना ही perfect है तो अध्यात्म की शिक्षा में विपरीत क्यों बताया जाता है ?
समझ नहीं आता था GAP कहा है , एक तरफ आस पास सब tip top , पर दूसरी तरफ Spiritual contents में सुनते है worldly matter में attachments , desires नहीं रखने चाहिए , कैसे न रखें प्रभु जब सब बढ़िया चल रहा है ?
धीरे धीरे कुछ चीज़ें समझ में आयी जैसे की -
- हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती |
- हाथी के दांत दिखाने के कुछ खाने के कुछ और होते हैं |
आज की life ने हमे अपनी Marketing कैसे करनी है , इसमें भी involve कर लिया है , गहराई से देखे तो commercial life और individual life अलग ही हैं |
सत्संग सिर्फ individual level पर समझने और apply करने के लिए है , और उसका प्रभाव सिर्फ हमारे आचरण में ही दिख सकता है और कहीं भी नहीं , and rest ongoing events of life तो चलते ही रहते है |
YES , This bridges the GAP.
अब बात आती है सत्संग में जीवन को दुखालय क्यों कहा जाता है ? ऐसा नहीं, यह भी बताया जाता है जीवन infinite आनंद में जीने के लिए मिला है, includes life with compassion , however without attachments & addictions. Individual level पर तो कोई deny नहीं कर सकता ,हमें ups and down का सामना करना ही पड़ता है , कभी health issues , कभी financial , कभी relationship , कभी mind related . इन UPS and DOWNS में constant witness होक कैसे जीवन जीना है , यहीं अध्यात्म है , hence everything to apply and learn at individual level.
हो सकता है social life में हमारी बहुत वाह वाही होती है, पैसा भी अथाह हो , वस्तु विशेष की कमी भी न हो, पर still individual level पर हर जीव contenment and happiness within hi ढूंढता है या ढूंढेगा depending upon one's own situation.
यह भी हो सकता है हमारी social life में वाह वाही न होती हो या पैसा भी न हो , पर फिर भी अपने भीतर असीम आनंद में रह सकते है |
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अगर सब इतना ही perfect है तो अध्यात्म की शिक्षा में विपरीत क्यों बताया जाता है ?
समझ नहीं आता था GAP कहा है , एक तरफ आस पास सब tip top , पर दूसरी तरफ Spiritual contents में सुनते है worldly matter में attachments , desires नहीं रखने चाहिए , कैसे न रखें प्रभु जब सब बढ़िया चल रहा है ?
धीरे धीरे कुछ चीज़ें समझ में आयी जैसे की -
- हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती |
- हाथी के दांत दिखाने के कुछ खाने के कुछ और होते हैं |
आज की life ने हमे अपनी Marketing कैसे करनी है , इसमें भी involve कर लिया है , गहराई से देखे तो commercial life और individual life अलग ही हैं |
सत्संग सिर्फ individual level पर समझने और apply करने के लिए है , और उसका प्रभाव सिर्फ हमारे आचरण में ही दिख सकता है और कहीं भी नहीं , and rest ongoing events of life तो चलते ही रहते है |
YES , This bridges the GAP.
अब बात आती है सत्संग में जीवन को दुखालय क्यों कहा जाता है ? ऐसा नहीं, यह भी बताया जाता है जीवन infinite आनंद में जीने के लिए मिला है, includes life with compassion , however without attachments & addictions. Individual level पर तो कोई deny नहीं कर सकता ,हमें ups and down का सामना करना ही पड़ता है , कभी health issues , कभी financial , कभी relationship , कभी mind related . इन UPS and DOWNS में constant witness होक कैसे जीवन जीना है , यहीं अध्यात्म है , hence everything to apply and learn at individual level.
यह भी हो सकता है हमारी social life में वाह वाही न होती हो या पैसा भी न हो , पर फिर भी अपने भीतर असीम आनंद में रह सकते है |
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