ॐ गुरु
कर्मयोग principle :
मेहनत किये , पर फिर आशारहित , मोह रहित , worry free रहना और हर कर्म के फल में uncertainty की probability रखना , यह एक समझदार व्यक्ति का state of mind है |
Mind की आदत है material emotions में बह जाने की , तो इसे निःसंकल्प अवस्था में लाना ज़रूरी है |
कैसे ?
- सोऽहं : श्वास चल रहीं है , उसका साक्षी बनकर |
यह अभ्यास ही पुरुषार्थ है |
तो यह याद रहे इसीलिए gentle reminder है की mind को निःसंकल्प अवस्था में लाना ही aim होना चाहिए वर्ना monkey mind कब एक जंगल से आसमान और आसमान से जंगल की और दौड़ता है , जानने में तो आता है , पकड़ने में नहीं |
तो साक्षी बने रहने का अभ्यास निरंतर रहे | need not identify self with mind.
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